ज़्यादातर टिनिटस एक ऊँची पिच वाला टोन होता है, लगभग 4,000 से 9,000 Hz के बीच, लेकिन यह हल्की गुनगुनाहट से लेकर 10,000 Hz से ऊपर की सीटी तक कुछ भी हो सकता है, और दोनों कानों में अलग भी हो सकता है। अपनी फ्रीक्वेंसी मिलाने से टिनिटस नहीं बदलता; इससे आपको पता चलता है कि आप किस आवाज़ से जूझ रहे हैं, आपके पास एक संख्या होती है जो आप ENT डॉक्टर या ऑडियोलॉजिस्ट को दिखा सकते हैं, और आप ऐसी आवाज़ चुन पाते हैं जो उसी पिच को ढके।
ऐप में फ्रीक्वेंसी कैसे मिलाएँ (कदम दर कदम)
- हेडफ़ोन लगाएँ (हर कान अलग से मिलाने के लिए ज़रूरी), शांत कमरा चुनें, वॉल्यूम मध्यम रखें।
- टोन शुरू करें; डायल को नीचे से ऊपर की ओर घुमाएँ, जब तक टोन आपके कान बजने के सबसे करीब न लगे।
- ऑक्टेव जाँच: उस टोन की तुलना एक ऑक्टेव ऊपर (दोगुनी फ्रीक्वेंसी) और एक ऑक्टेव नीचे (आधी फ्रीक्वेंसी) वाले टोन से करें। लोग अक्सर ऐसा टोन चुन लेते हैं जो असली से दोगुना ऊँचा या आधा नीचा होता है। एक अध्ययन (PubMed 23130542) में पाया गया कि ऑनलाइन पिच मैचिंग क्लिनिक जितनी सटीक हो सकती है, और सबसे आम गलती यही ऑक्टेव की उलझन थी।
- Premium: दूसरे कान के लिए यही दोहराएँ, और हर कान के लिए अलग वॉल्यूम सेट करें।
- टोन को इतना धीमा रखें कि मुश्किल से सुनाई दे। संख्या कहीं लिख लें।
फ्रीक्वेंसी मिलाना और दोनों कानों के लिए एक जैसा टोन ऐप में फ्री है; हर कान के लिए अलग टोन Premium में है (कीमत और Premium)।
संख्या मिलने के बाद क्या करें
- ढकने वाली आवाज़ चुनें: ऊँची सीटी जैसा टिनिटस हो तो ब्राउन नॉइज़ या बारिश; धीमी गुनगुनाहट हो तो पिंक नॉइज़ या व्हाइट नॉइज़।
- टोन को आवाज़ के नीचे मिलाएँ: धीमे वॉल्यूम पर टोन को बैकग्राउंड आवाज़ के नीचे चलाएँ। बहुत से लोगों को लगता है कि ऐसे कान बजने की आवाज़ “बाहर से” आती महसूस होती है, और इसी से आदत पड़ने की शुरुआत होती है। यह हर किसी के साथ नहीं होता, और इसका कोई पक्का सबूत नहीं है।
- अपने ENT डॉक्टर या ऑडियोलॉजिस्ट को बताएँ: पिच और लाउडनेस मैचिंग टिनिटस की जाँच का एक हिस्सा होती है; आपकी संख्या बातचीत की अच्छी शुरुआत है।
- बदलाव पर नज़र रखें: तनाव, तेज़ शोर या सर्दी-ज़ुकाम के साथ टिनिटस की फ्रीक्वेंसी बदल सकती है। महीने में एक बार फिर से मिलाएँ।
सीमाएँ और सुरक्षा
यह सुनने की जाँच (हियरिंग टेस्ट) नहीं है, न ही कोई निदान। वॉल्यूम कम रखें: टिनिटस की फ्रीक्वेंसी पर तेज़ टोन चुभता है और उसका कोई फ़ायदा नहीं। दर्द हो तो तुरंत बंद कर दें। अक्सर सुनने की कमी उसी फ्रीक्वेंसी पर होती है जहाँ टिनिटस है; यह किसी विशेषज्ञ से जाँच करवाने की वजह है, उससे बचने की नहीं। भारत में ऑडियोलॉजी जाँच ENT विभागों और AIISH मैसूरु जैसे संस्थानों में होती है, जहाँ टिनिटस का अलग से मूल्यांकन किया जाता है।
FAQ
मेरे टिनिटस की फ्रीक्वेंसी क्या है?
ज़्यादातर लोगों में यह 4,000 से 9,000 Hz के बीच होती है, पर यह बहुत नीचे या 10,000 Hz से ऊपर भी हो सकती है। सबसे आसान तरीका है हेडफ़ोन लगाकर 100 से 15,000 Hz के टोन को धीरे-धीरे घुमाना और ऑक्टेव जाँच करना।
क्या दोनों कानों में टिनिटस की फ्रीक्वेंसी अलग हो सकती है?
हाँ। बहुत से लोग हर कान में अलग पिच या अलग तेज़ी सुनते हैं। इसलिए हेडफ़ोन लगाकर हर कान को अलग से मिलाना बेहतर है।
फ्रीक्वेंसी मिलाना कितना सटीक है?
सावधानी से किया जाए तो काफ़ी सटीक। रिसर्च में ऑनलाइन मैचिंग क्लिनिक जितनी अच्छी पाई गई है। सबसे बड़ी गलती ऑक्टेव की उलझन है, इसलिए हमेशा एक ऑक्टेव ऊपर और नीचे से तुलना करें।
क्या अपनी टिनिटस फ्रीक्वेंसी सुनने से वह और बढ़ जाता है?
धीमे वॉल्यूम पर कोई नुकसान दर्ज नहीं हुआ है। टोन को मुश्किल से सुनाई देने लायक रखें, और कोई तकलीफ़ हो तो बंद कर दें।
सही फ्रीक्वेंसी मिलने के बाद भी टोन “गलत” क्यों लगता है?
अक्सर यह ऑक्टेव की उलझन होती है: आपने जो टोन चुना वह असली से दोगुना ऊँचा या आधा नीचा है। एक ऑक्टेव ऊपर और नीचे वाले टोन को सुनकर तुलना करें। टिनिटस कई बार शुद्ध टोन की जगह सरसराहट जैसा भी होता है।
क्या यह सुनने की जाँच है?
नहीं। यह फ्रीक्वेंसी मिलाने का एक तरीका है, हियरिंग टेस्ट या निदान नहीं। सुनने की जाँच के लिए ऑडियोलॉजिस्ट या ENT डॉक्टर के पास जाएँ।
Tinnitus Relief App मेडिकल डिवाइस नहीं है। अगर टिनिटस अचानक शुरू हुआ है, सिर्फ़ एक कान में है, दिल की धड़कन के साथ धड़कता है, या उसके साथ सुनाई कम देना, चक्कर आना या कान में दर्द हो, तो ENT डॉक्टर को दिखाएँ। ऐप iOS और Android के लिए फ्री डाउनलोड करें।
स्रोत
- ऑनलाइन टिनिटस पिच मैचिंग की सटीकता, क्लिनिक से तुलना, PubMed 23130542: https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/23130542
- AIISH मैसूरु, Hearing disorders (टिनिटस पर हिंदी पुस्तिका): https://aiishmysore.in/public/communication-disorder/hearing-loss/hearing-disorders
- MSD Manual (हिंदी), कान में घंटी बजना या गूंज होना: https://www.msdmanuals.com/hi/home/ear-nose-and-throat-disorders/symptoms-of-ear-disorders/ear-ringing-or-buzzing
- Tunkel DE et al., AAO-HNS Clinical Practice Guideline: Tinnitus, 2014: https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/25273878

